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भाईयों और बहनों, आज मैं अपनी जिंदगी के एक अहम मोड़ पर आपसे बात कर रही हूं। मैं सालों से शो बिज की जिंदगी गुजार रही हूं और इस अरसे में मुझे हर तरह की शोहरत, इज्जत और दौलत अपने चाहने वालों की तरफ से नसीब हुई। जिसके लिए मैं उनकी शुक्रगुजार हूं। लेकिन अब कुछ दिन से मुझ पर ये एहसास कब्जा जमाए हुए है कि इंसान के दुनिया में आने का मकसद क्या सिर्फ यह है कि वो दौलत और शोहरत कमाए? क्या उस पर ये फर्ज आयद नहीं होता कि वो अपनी जिंदगी उन लोगों की खिदमत में गुजारे जो बे-आसरा और बेसहारा हैं?

क्या इंसान को ये नहीं सोचना चाहिए कि उसे किसी भी वक्त मौत आ सकती है? और मरने के बाद उसका क्या बनने वाला है? इन दो सवालों का जवाब, मैं मुद्दत से तलाश कर रही हूं। खासतौर पर इस दूसरे सवाल का जवाब कि मरने के बाद मेरा क्या बनेगा। इस सवाल का जवाब जब मैंने अपने मजहब में तलाश किया तो मुझे पता चला कि दुनिया की ये जिंदगी असल में मरने के बाद की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए है। और वो इससे सूरत में बेहतर होगी।

इसलिए मैं आज ये ऐलान करती हूं कि आज से मैं अपने शो-बिज की जिंदगी छोड़कर इंसानियत की खिदमत और अपने पैदा करने वाले के हुकुम पर चलने का पक्का इरादा करती हूं। तमाम बहनों और भाईयों से दरख्वास्त है कि वो अब मुझे शो-बिज के किसी काम के लिए दावत न दें। बहुत-बहुत शुक्रिया।

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